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Showing posts from February, 2020

उस सर्द रात की सुबह नहीं

      न जाने कैसे बीतेगा ये पल। ईश्वर इतनी बेबसी किसी को न दे। बस इसी ख़्याल को अपने ज़ेहन में लिए लांची कभी अपने मासूम बेटे को देखती तो कभी अपने पति सोमेश को।                          उसकी आंखों में आंसूओं का समंदर बह रहा था, लेकिन आंखों के किनारे पर आकर ठहर जाता। और फिर था भी कौन, जो उसके आंसूओं की गहराई को समझ पाता....।             चारों और आंखों को चुंधियाती  रंग—बिरंगी रोशनी और धूम धड़ाके का शोर था...। बस खामोशी थी जो उसके भीतर ही भीतर गहराती चली जा रही थी। लेकिन मजबूर थी वो इस वक़्त के आगे। बस उसकी बेबस आंखें एकटक लगी थी अपने पति की लाचारी पर। आज पैसा होता तो क्या यूं बिना कपड़ों के इस थीम पार्टी में प्रहरी बनकर खड़ा होने को मजबूर होना पड़ता...। चलो मौसम साफ होता तो भी अपने पति को यूं देख लेती। मगर आज तो शहर का पारा गिरा हुआ है। सुबह से ही बादलों की आवाजाही है और तेज हवाएं चल रही ​है। ...लोग इस गिरे हुए पारे में कांप रहे है..वो भी तब जबकि मोटे स्वेटर और शॉल से ख़ुद को ढांक रखा है।          फिर लांची का पति सोमेश तो इस शादी पार्टी की थीम के अनुसार खुले तन पर सुनहरी चमक का ल

'नहीं रहा अब कोई प्रश्न चिन्ह’

       मुझे ठीक से याद नहीं, आखिर वो तारीख कौन सी थी जब मैं प्रो. सिन्हा से पहली बार मिली थी।   लेकिन उनकी सुनाई वो पंक्तियां आज भी मुझे याद है जिसमें जिंदगी का सार है। आज भी कभी-कभार गुन गुना लिया करती हूं।    ''क्या जाने कब तक हो जाए जीवन के दिन पूरे    एक अधूरी आस लिए,    अधूरी प्यास लिए    चली जाउगी मैं इस दुनिया से    रोता छोड़ सभी को''         ये महज कुछ पंक्तियां ही नहीं थी, जिंदगी की वो एक सच्चाई है जिसे मैंने प्रो. सिन्हा से जाना था।   हुआ यूं कि किसी कार्यक्रम के दौरान मुझे एक वृद्धाश्रम में जाने का मौका मिला। यह पहली बार था जब मैं किसी वृद्धाश्रम में आई थी और बुढ़ापे को इतने करीब से देख रही थी। एक बेटा अपनी मां से कह रहा था, बार-बार क्यूं फोन करवाती हो, मेरे पास इतना वक़्त नहीं कि, तुम्हारे किसी भी समय बुलाने पर मैं आ सकूं।           एक बुढी मां की आंखों से बेबसी व लाचारी के आंसू टपक रहे थे।  वहां से दाएं जाकर संचालिका का कैबिन था। मैं इस भावनात्मक रिश्ते के कमजोर कर देने वाले उन पलों को छोड़कर आगे चल दी।        मगर कैबिन पहुंचती उससे पहले ही मैंने कुछ औ