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Showing posts from October, 2020

चिट्ठी का प्यार...

          रमौली ख़ुद से ख़ुद की बातों में दिनरात उलझी हुई हैं। एक घुटन सी हैं उसके चारों और..। जहां पर उसका सिर्फ बनावटी चेहरा हैं। सारे रिश्तें नातों के बीच भी वह ख़ुद को अधुरा पाती हैं। उसकी वजह था  'शिवा'...।        बात उन दिनों की हैं जब गांव में नए डाक बाबू आए थे। बलरामपुर गांव में एक ही डाकघर था। वो भी गांव की चौक के बीचों—बीच। इस गांव की सीमा चार गांवों से लगती थी और उन सभी चारों गांवों की सीमा शहर से जुड़ी हुई थी। लेकिन केंद्र बिंदु में बसे बलरामपुर से ही लोगों की डाक पहुंचाई जाती थी।   नए डाक बाबू को बंद कमरों में बैठकर डाक की छंटनी करने में घुटन होती थी। इसीलिए वे डाकघर के बाहर खुली हवा में ओटले पर बैठकर ही चिट्ठियों की छंटनी किया करते थे। इस दौरान धीरे—धीरे वे पूरे गांव वालों को अच्छे से जानने और समझने लगे थे। डाकघर के सामने से गुज़रने वाला हर आदमी उन्हें नमस्कार करता हुआ जाता।      रमौली भी डाक बाबू से बेहद घुलमिल गई थी। रमौली के पिता गांव में अपनी व्यवहारकुशलता के लिए जाने जाते थे। गांव वालों के बीच उनकी बड़ी इज्ज़त और दबदबा था। डाक बाबू को भी इनका बहुत सहारा था। अ

कदम—कदम पर हाथरस...

अब समाज को ही उठाना होगा कदम    दिल्ली में निर्भया के साथ हुई दरिदंगी और गैंगरेप के बाद पूरा देश उबाल पर था। देश के हर कोने कोने से आक्रोश चरम पर था। जगह—जगह पर धरने प्रदर्शन हुए और सभी की एक मांग थी आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए और देश में अब बलात्कारियों के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाए। क्या हुआ... निर्भया के दोषियों को सजा दिलवाने में उसके मां—बाप को आठ साल लग गए और कड़े कानून बनने के बाद भी क्या इन दरिंदों की हैवानियत में कोई कमी आई  ?  क्या इन पिछले आठ सालों में इस तरह की घिनौनी वारदातों में कोई रोक लगी  ?             आज उसी तरह उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक युवती के साथ जो दरिंदगी हुई हैं उस पर देशभर में जबरदस्त गुस्सा हैं। देश के कई हिस्सों से लोग आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। विभिन्न संगठनों द्वारा इस बेटी को न्याय दिलाने के लिए हजारों कैंडल जलाए जा रहे हैं। इंसाफ पाने के लिए नारेबाजी की जा रही हैं। सोशल मीडिया पर भी कई तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं।     लेकिन कब तक ये ही एक सिलसिला इस देश में चलता रहेगा? कब तक बलात्कार होते रहेंगे और पीड़िता को न्याय दिलान