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Showing posts from September, 2021

सात फेरे...

  तीर्थव्रतोद्यापन यज्ञकर्म मया सहैव प्रियवयं कुर्याः। वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति वाक्यं प्रथमं कुमारी।।          कन्या वर से कहती है कि यदि आप कभी तीर्थयात्रा पर जाएं तो मुझे साथ लेकर जाइए। किसी भी व्रत-उपवास या अन्य धार्मिक संस्कारों में मुझे आज की तरह ही अपने वाम भाग में स्थान दीजिए। यदि आप जीवन-यात्रा के लिए मुझे स्वीकार करते हैं तो मैं आपके वाम अंग में आना स्वीकार करती हूं। टीना शर्मा 'माधवी' " स्वीकार हैं " ..... यज्ञवेदि की लपलपाती हुईं अग्नि को साक्षी मानकर जब शास्वत ने " स्वीकार हैं " कहा था तब अग्नि की लपटें भी मानो चंदन सी शीतल हो गई थीं औऱ यह सुनकर मेरे मन के मंजीरे बजने लगें थें। आज वहीं मन ज्वालामुखी सा धधक रहा हैं , गर्म आँसू लावा की तरह मेरे गालों को जला रहें हैं ।  आज जो शब्दों के ख़ंजर शाश्वत ने भोंके हैं उनसे मेरा सीना छलनी हो गया हैं । " तलाक क्यों नहीं ले लेतीं हों तुम " अब भी तलाक शब्द गूंज रहा हैं मेरे कानों में । कितना भारीपन हैं इस शब्द में ? जीवन यात्रा के लिए स्वीकार करने वाले वचन क्या बस यूँ ही कह दिए थें ?  "

सपनों की दे​ह पर.....

 सपनों की दे​ह पर सुलग रही है तमाम उम्र की ख़्वाहिशें इक पल की ख़ुशी की ख़ातिर न जानें कितनी रातें गुज़ारी हैं करवटों में..।  आज ज़रा हथेली क्या देख ली ख़ुद की 'लकीरें' ही मिट गई...।  उफ! ये ख़्वाहिशें और इसे पा लेने की चाहतें, न जानें क्या—क्या 'लूट' गया पीछे। 'चैन ओ सुकून' का उठना—बैठना तसल्ली का घूंट और वो निवाला बेफिक्र नीेंदें वो अपनेपन की थप्पी और वो हंसी ठट्ठे का शोर...।  सपनों की देह पर अब सुलग रही हैं सिर्फ 'आह' आज सोचा है यूं कि बस और नहीं,      अब और नहीं...।  'दोस्ती वाली गठरी' ..... ठहर जाना ऐ, 'इंसान'..... 'फटी' हुई 'जेब'.... 'गुफ़्तगू' हैं आज 'दर्द' से.... कभी 'फुर्सत' मिलें तो...