Skip to main content

'विश्व हृदय दिवस'

अकसर हम सुनते हैं और कहते भी हैं कि, आज मेरे सीने में दर्द हो रहा हैं...या आज सुबह से ही मेरे बाएं हाथ में अजीब सा दर्द या झंझनाहट महसूस हो रही हैं...। 

सिद्धी शर्मा
 फिर भी हम सिर्फ देसी उपचार या घर पर रखी दर्द निवारक दवा लेकर रह जाते हैं...। मगर अब नहीं, अब ज़रा थोड़ा और अधिक 'हेल्थ कांशस' यानि स्वास्थ्य के प्रति जागरुक और सतर्क हो जाइए...और दिल संबंधी बीमारी की सही जानकारी भी रखें। 

       'कोरोना काल' ऐसे कई लोगों की कहानियां भी अपने पीछे छोड़ गया हैं जो कई गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे जिनमें हृदय संबंधी बीमारी भी शामिल हैं। कुछ लोग अपनी जागरुकता और समय—समय पर मेडिकल सलाह लेकर अपने हार्ट की देखभाल कर रहे हैं...लेकिन ​कुछ लोग अब भी लापरवाह बनें हुए हैं। 

     ख़ुद डॉक्टर्स और मेडिकल साइंस ने भी इस बात को स्वीकारा है कि हृदय संबंधी बीमारी वालों को कोरोना संक्रमित होने का ख़तरा हैं। ऐसे में 'कहानी का कोना' ब्लॉग आज आपको अपने हृदय की देखभाल करने की अपील करता हैं। 

   आज चूंकि 'विश्व हृदय दिवस' हैं, इसीलिए ख़ुद का ख़याल रखने का संकल्प लें और समय—समय पर अपना मेडिकल चेकअप भी कराएं। पिछले डेढ़ साल से हम सभी की दिनचर्या बदल गई है... 'वर्क फ्रॉम होम' जैसी नई कल्चर का जन्म हो गया हैं। ऐसे में कुछ लोग ​ए​क निश्चत समय सीमा के बाहर भी अपना काम कर रहे हैं। जिससे उनकी 'पर्सनल और प्रोफेशनल' टाइमिंग गड़बड़ा गई हैं। जिससे उनका दिमाग तनाव में रहने लगा हैं। 

   जिसका सीधा असर हृदय पर पड़ रहा हैं। यदि आप ऐसी ही स्थिति से गुजर रहे हैं तो एक बार ठहरकर सोचें और अपनी दिनचर्या को आज ही से मैनेज करें। किसी भी सूरत में मानसिक अवसाद या कहें ओवर लोडेड वर्क की टेंशन से बचें। 

   निश्चत ही हम सभी इन बेसिक बातों को जानते हैं लेकिन फिर भी मानते नहीं हैं...। यदि आपकी दिनचर्या भी अव्यवस्थित हो रही हैं तो आज ही से उसे व्यवस्थित करने का संकल्प लें....। 

   ये ब्लॉग बस आपको अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग और सतर्क रहने के लिए लिखा गया हैं। आपको क्या खाना चाहिए और कौन—सा मेडिकल चेकअप करवाना चाहिए ये सारी जानकारी आप अपने डॉक्टर्स की सलाह पर लें...।

  'विश्व हृदय दिवस' पर आप सभी को बेहतर स्वास्थ्य की शुभकामनाएं...। 

  ...................


Comments

Popular posts from this blog

स्वदेशी खेल...राह मुश्किल

        हाल ही में केंद्रीय खेल मंत्रालय ने 'खेलों इंडिया यूथ गेम्स—2021' में चार स्वदेशी खेलों गतका, कलारीपयट्टू, थांग—ता और मलखम्ब को शामिल किया हैं। कोरोनाकाल के बीच सुखद अहसास का अनुभव कराती हुई ये ख़बर वाकई खेल जगत और खिलाड़ियों के लिए एक सकारात्मक और दूरदर्शी फैसला हैं।      हमारी भारतीय संस्कृति हमेशा से ही समृद्ध और संपन्न रही हैं। चाहे वो हमारे वैदिक संस्कारों की बात हो या फिर खान—पान, वेशभूषा, रहन—सहन और पांरपरिक खेलों की। ये ही असल में हमारी पहचान भी हैं।      ऐसे में स्वदेशी खेलों को आगे बढ़ाने से ना​ सिर्फ 'पारंपरिक खेलोें' को अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर पहचान मिलेगी बल्कि देश के गांव—कस्बों में रहने वाले हजारों लाखों युवाओं को भी आगे बढ़ने का मौका मिल सकेगा।      हमारे गांवों की प्रतिभाएं हमारी संस्कृति और पंरपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी। क्योंकि हमारे ये ही पारंपरिक खेल विभिन्न भारतीय राज्यों की सांस्कृतिक और पारंपरिक पृष्ठभूमि को भी दिखाते हैं।       यदि हम अपने पारंपरिक खेलों की बात करें तो उसमें ना सिर्फ जीवन जीने

'फटी' हुई 'जेब'....

आज 'फादर्स—डे' हैं। ये दिन पिता के प्रति अपनी कृतज्ञता दिखाने का ​सिर्फ एक माध्यम हैं। निश्चित ही बदलते वक़्त के साथ आज एक गंभीर और कड़क स्वभाव वाले पिता की जगह 'नरम दिल' और 'दोस्ताना' व्यवहार के साथ आज का पिता खड़ा हैं। यह एक अच्छा साइन भी हैं...।       पिता चाहे गरीब हो या अमीर वह सिर्फ अपने बच्चों की इच्छाएं पूरी करने में लगा रहता हैं...   और असल में यहीं हमारी संस्कृति का हिस्सा भी हैं। इसी भावनात्मक रिश्तें पर आधारित हैं ये कविता....।       बाप की 'फटी' हुई जेब से जो ख्वाहिशें पूरी हुई        वो 'बेहिसाब' हैं...।   खिलौना खरीदने की औकात न थी, फिर भी खरीद कर दे देने की    उनकी हिम्मत  भी  'बेहिसाब' हैं।   सिद्धी शर्मा     'राजकुमारी' की तरह अपनी पलकों पर बैठाकर रखने का      उनका हौंसला भी बेहिसाब हैं..।      इच्छा पूरी न कर पाने की उनकी अपनी    मजबूरियां  भी बेहिसाब हैं...।      आंखों में आंसूओं को छुपाकर रख लेने का उनका      अंदाज भी बेहिसाब हैं...।      और मेरी खुशी देख अपने होंठों पर मुस्कान सजाकर      रखना भी 'बेहिसाब&

टूट रही 'सांसे', बिक रही 'आत्मा'

   देश कोरोना से 'कराह' रहा हैं। कोरोना की दूसरी लहर खतरनाक होती जा रही है। यह महामारी अब दिल दहलाने लगी हैं। भारत में इस कोरोना वायरस के  संक्रमण से जान गंवाने वालों की संख्या थमने का नाम नहीं ले रही। बीते दस  दिनों में ही भारत में 3 लाख से अधिक संक्रमित मामले दर्ज किए गए हैं। स्थिति यह हो गई है कि एक दिन में ही रेकार्ड 3,000 से भी ज्यादा लोगों की जानें जा रही है।       संक्रमण के इन बढ़ते आंकड़ों के बीच अपनों को खोते जा रहे हैं लोग...। चारों ओर शमशान घाटों पर शवों की लंबी कतारें लगी हुई हैं...अपनों की एक—एक सांसे बचाने के लिए लोग इधर—उधर भाग रहे हैं...। कभी डॉक्टर्स तो कभी अधिकारियों व मंत्रियों के पैरों में गिर ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं। इस बेबसी की 'आह' का शोर कानों को चीर रहा हैं। मजबूरी चीख रही हैं, बचा लो 'साहब'...।       लेकिन इन डरावनें हालातों के बीच ऐसे बदसूरत और घिनौने चेहरे भी सामने आ रहे हैं जो कहने को तो 'ज़िंदा' हैं लेकिन इनकी आत्मा मर चुकी हैं। इंसान के भेष में ये शैतानी लोग हैवानियत की सारे हदें पार कर रहे हैं। मरीज ऑक्स