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About us

नमस्कार,

    मैं अपने ब्लॉग kahani ka kona (human touch) पर आप सभी का स्वागत करती हूं। मेरी कहानियों को पढ़ने और उन्हें पसंद करने के लिए आप सभी का
दिल से शुक्रिया अदा करती हूं। मैं मूल रुप से एक पत्रकार हूं और
पिछले पंद्रह सालों से सामाजिक मुद्दों को रिपोर्टिंग के जरिए अपनी लेखनी से उठाती रही हूं। इस दौरान मैंने महसूस किया कि पत्रकारिता की अपनी सीमा होती हैं कुछ ऐसे अनछूए पहलू भी होते हैं जिसे कई बार हम लिख नहीं सकते हैं।
   
ऐसे ही मुद्दों को अपने ब्लॉग के जरिए कहानियों की शक्ल में आप तक पहुंचा रही हूं। मेरी कहानियां समाज से ही निकली है और समाज के लिए ही लिख रही हूं। इसका मकसद है कि आप अपने आसपास घटित होने वाले विषयों की बारीकियों को महसूस करें और उनके प्रति संवेदनशील रहें। कोई भी विषय छोटा या बड़ा नहीं होता बल्कि हमें अपनी सोच को गहरा करना होगा तभी हम एक सार्थक समाज को साकार रुप में देख सकेंगे। उम्मीद है मेरी कहानियों के मर्म को आप समझेंगे और इसकी वास्तविकता को महसूस भी करेंगे।



टीना शर्मा 'माधवी'

अधिक जानकारी व पेड प्रमोशन के लिए संपर्क करे - 
kahanikakona@gmail.com



Comments

  1. आपके विचार औऱ लेखनी दोनों ही बहुत दमदार हैं 👍🏻

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स्वदेशी खेल...राह मुश्किल

        हाल ही में केंद्रीय खेल मंत्रालय ने 'खेलों इंडिया यूथ गेम्स—2021' में चार स्वदेशी खेलों गतका, कलारीपयट्टू, थांग—ता और मलखम्ब को शामिल किया हैं। कोरोनाकाल के बीच सुखद अहसास का अनुभव कराती हुई ये ख़बर वाकई खेल जगत और खिलाड़ियों के लिए एक सकारात्मक और दूरदर्शी फैसला हैं।      हमारी भारतीय संस्कृति हमेशा से ही समृद्ध और संपन्न रही हैं। चाहे वो हमारे वैदिक संस्कारों की बात हो या फिर खान—पान, वेशभूषा, रहन—सहन और पांरपरिक खेलों की। ये ही असल में हमारी पहचान भी हैं।      ऐसे में स्वदेशी खेलों को आगे बढ़ाने से ना​ सिर्फ 'पारंपरिक खेलोें' को अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर पहचान मिलेगी बल्कि देश के गांव—कस्बों में रहने वाले हजारों लाखों युवाओं को भी आगे बढ़ने का मौका मिल सकेगा।      हमारे गांवों की प्रतिभाएं हमारी संस्कृति और पंरपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी। क्योंकि हमारे ये ही पारंपरिक खेल विभिन्न भारतीय राज्यों की सांस्कृतिक और पारंपरिक पृष्ठभूमि को भी दिखाते हैं।       यदि हम अपने पारंपरिक खेलों की बात करें तो उसमें ना सिर्फ जीवन जीने

टूट रही 'सांसे', बिक रही 'आत्मा'

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